लाॅक डाउन का मेरा चौथा दिन

बहन जी चाय बना दीजिए हम तीन आदमीहैं। मन इनके लिए श्रद्धा से भर उठा। बीमारी का डर इनको भी है दूसरों की जिंदगी के लिए ये सड़कों पर ह।

आज सुबह नाश्ता बनाने के लिए जब मैं रसोई में गई तो डोर बेल बजी ।मैंने दरवाजा खोला तो नगर निगम के सफाई कर्मचारी थे जो सड़क की सफाई करने के लिए आए थे। उनमें से महिला ने कहा –

पूरे विश्व में 28 हजार से ऊपर लोग कोरोना रूपी काल का ग्रास बन चुके हैं और भारत में 1 दिन में ही संक्रमित नए मरीजों की संख्या 200 पहुंच गई। मन आशंकित और खिन्न है ।ना जाने कैसे संक्रमण से देश बचेगा ,प्रशासन और पुलिस लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं हमारे पुलिसकर्मी ,डॉक्टर और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी दूसरों की जिंदगी के लिए अपने अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं ।पर आज एक खबर ने मन को बहुत धक्का पहुंचाया कि लोग हजारों की संख्या में अपने मेल राज्य जाने के लिए सड़कों पर उतर आए। माना कि उनके पास रहने की जगह नहीं है यह भी माना कि शायद वह भूखे पेट होंगे पर सरकारें तैयारी कर रही है शुरुआती दौर में तो थोड़े बहुत दिक्कत तो आती ही है । इससे बेहतर होता वे अपनी जरूरत के लिए मोबाइल से मीडिया के माध्यम से या हेल्प लाइन नंबर पर समस्या बताते ।संकट की घड़ी में धैर्य रखा जाना चाहिए जब तक सरकार का प्रबंध करे। ऐसे तो फिर लॉक डाउनलोडव सोशल डिस्टेंसिंग का उद्देश्य ही असफल हो जाएगा और देश को कोई भी महामारी रुपी गरत हो जाने से नहीं बचा पाएगा और जिस दिन वुहान और इटली की तरह हालात गंभीर हुए हमारी आबादी की अधिकता को देखते हुए सोचकर भी मन कांप उठता है तब हमारी स्थिति क्या होगी क्योंकि आबादी में हम दुनिया में नंबर दो पर और महामारी फैली तो फिर हुई मौतों में भी नंबर वन ही होंगे । कृपया घर रहें ,स्वयं और समाज को सुरक्षित रखें ।

लाॅक डाउन और मेरा तीसरा दिन

आज लाॅक डाउन का तीसरा दिन है सुबह देर से सोकर उठी।क्योंकि अब सुबह वाॅक पर बाहर नहीं जाती इसलिए घर पर ही आधा पौना घंटा एक्सरसाइज करती है। नाश्ता बना कर और घरेलू कार्य निपटा कर पढ़ने के लिए बैठी। दो -तीन दिन से मैं “आज भी खरे हैं तालाब” पुस्तक को पढ़ रही हूँ । पुस्तक बहुत ही रोचक है और तालाबों की अहमियत बताती है।।कितने वैज्ञानिक तरीकों से बिना इंजीनियरों के ,बिना मशीनों के तालाब बनाने वाले तालाब बनाते थे उसकी पूरी प्रक्रिया इस पुस्तक में लिखी है ।कल तक शायद यह पुस्तक खत्म हो जाएगी बहुत कुछ सीखने को मिला- तालाबों की खुदाई की प्रक्रिया, उनका रखरखाव ,सुरक्षा, फायदे बहुत विस्तार के साथ इसमें बताया गया है। आज मैं थोड़ा सा व्याकुल रही ।कहीं ना कहीं विद्यालय याद आने लगा है इस तरह बिना आवश्यक कार्य के लंबी छुट्टी लिए घर के अंदर बंद रहकर पहली बार बिता रही हूँ । मुझे मेरी कर्मभूमि, मेरे विद्यार्थी, उनके साथ अंतःक्रिया, उनकी बातें सब कुछ याद आ रहा है।परन्तु सुरक्षित रहना है, घर के अंदर रहना है और अपने साथ साथ दूसरों को भी बचाना है यही देश हित में मानते हुए इस व्याकुलता को थोड़ा नियंत्रित करना पड़ता है ।काम निपटा कर शाम को’ कबीर सिंह ‘मूवी देखी ।शाहिद कपूर का अभिनय बहुत ही कमाल का था परंतु ना जाने क्यों प्रेम के लिए कर्तव्य से विमुख होना अच्छा नहीं लगा ।कबीर जैसे बढ़िया सर्जन का जीवन देश के लिए है ,प्रेम में वियोग मिलने पर भी अगर वह गंभीरता से अपना कर्त्तव्य पूरा करता और नशे का एडिक्ट ना होता तो और भी अच्छा लगता । परमपिता परमात्मा से मेरे परिवार के लिए ,मेरे देशवासियों के लिए और संपूर्ण मानव जाति के लिए इस महामारी से सुरक्षा की प्रार्थना करती हूं।

लॉक डाउन का पहला दिन

कल अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि आज रात 12:00 बजे से देश में कोरोना के कहर से बचने के लिए 21 दिन का लॉक डाउन शुरू हो जाएगा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यक सामान और आवश्यक सेवाएं आम जनता के लिए उपलब्ध रहेंगे इसलिए किसी तरह की चिंता ना करें और अपने घरों में रहकर इस वायरस से को हराने में मदद करें। लाॅक डाउन के पहले दिन सर्वप्रथम घरेलू कार्य निपटाए । यूं तो कामकाजी महिला होने के बावजूद मैं अपने सभी घरेलू कार्य खुद ही करती हूं बस घर में सफाई वाली आती है। सफाई वाली को मैंने पूरे महीने का वेतन देकर

उसे 21 दिन घर पर ही रहने की सलाह दी ।उसके बाद मैंने खाना बनाना, बर्तन बर्तन, सफाई ,कपड़े धोने ,प्रेस करने जैसे घरेलू कार्य आम दिनों की तरह ही निपटाए ।कुछ समय मैंने व्हाट्सएप और फेसबुक पर मैसेजेस देखने में बिताया उसके बाद मैंने ‘कोरोना का जहर’ नामक विषय पर प्रतिलिपि पर एक कविता लिखी। समाचार पत्र में इटली और अमेरिका के हालात देखकर मन चिंतित हो उठा कि कहीं मेरा देश भी लोगों की अज्ञानता और लापरवाही से कोरोना की भयंकर चपेट में ना आ जाए ।शाम को पति के साथ ‘सांड की आंख ‘मूवी देखें जो हरियाणवी पृष्ठभूमि पर आधारित है ।हरियाणवी महिलाएं दिन रात पुरुषों से अधिक मेहनत करती हैं पर यहां के समाज में पुरुषों का अहंकार महिलाओं को सामान्य इंसान भी नहीं समझता।”क्या खाती हो दोनों बिल्कुल बुलस्आइ में निशाना लगाया है ।” गाली”और “सिर्फ मूंछों और धोती से कोई मर्द नहीं बनता ” महाराजा के महल में दोनों की बातचीत-“महाराजा महारानी पर कितना गर्व महसूस करें अपने आदमी भी आपणे पै गर्व करेंगे के ” के प्रत्युत्तर में- बेबे म्हारे आदमी नै जब पता लगैगा तो लाठी और डंडे से अपनी टांग तोड़ेंगे।” जेसे डायलॉग्स तो मन को छू ग्ए।दोनों बेटे बाहर है आ नहीं पाए घर ।दिन में दो-तीन बार उनसे बात की। शाम को टीवी से अपडेट लिया जानकर संतोष हुआ कि देश के नागरिकों ने स्थिति की भयावहता को समझा और लाॅक डाउन में पूरा साथ दिया ।

प्रतिलिपि पर पढ़ें – “रोको ये कोरोना का जहर”

“रोको ये कोरोना का जहर”, को प्रतिलिपि पर पढ़ें : https://hindi.pratilipi.com/story/kyjeb7eiq62s?utm_source=android&utm_campaign=content_share भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!

प्रतिलिपि पर पढ़ें – “देहान्त से एकान्त बेहतर है”

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अफवाहों से सावधान रहें

पूरा विश्व पर कोरोना कोविड 19 का कहर बरपा हुआ है। भारत भी संक्रमणकी गिरफ्त में है और बीमारी सेकिंड फेज में प्रवेश कर ग्ई है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लोगों को ज्यादा से ज्यादा घरों में रहने की प्रार्थना की है ।स्कूल ,कॉलेज, यूनिवर्सिटी बंद कर दिए गए हैं ।यह संकट की घड़ी है लेकिन इस परिस्थिति में इंसानियत और मानवता की भी परख होगी। हमें सिर्फ अपने को नहीं बचाना है बल्कि दूसरों को भी बचाना है। इसके लिए जरूरी है कि हम अफवाहों से सावधान रहें हमारा देश वह देश है जहां करोड़ों लोग भूखे पेट सोते हैं ।अगर हमें भी किसी दिन भूखा रहना पड़ गया तो कोई बड़ी बात नहीं है इस बहाने शरीर का शुद्धिकरण हो जाएगा। इसलिए संग्रह ना करें जितने भी संसाधन हैं मिल बांट कर दूसरे का ख्याल रखते हुए उनका उपयोग करें। एक महीने का खुद काराशन इकट्ठा करने की बजाय अगर 10 घर उसी सामान को तीन-तीन दिन चला लें तो वह मानवता की पराकाष्ठा होगी। हमें सहयोग करना है एक दूसरे का और इस संकट की घड़ी से अदम्य जिजीविषा शक्ति के साथ बाहर निकलना है।हमें सिद्ध करके दिखाना है कि भारतीय संस्कृति संसार की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है जहां ‘स्व हित’ की अपेक्षा ‘परहित’ सदा सर्वोपरि रहा है।करुणा ,सहयोग, सद्भावना ,सहायता ,त्याग हमारी संस्कृति के आभूषण हैं इस आपदा की इस घड़ी में दूसरों का सहयोग करके हमने इन आभूषणों की आभा को और दमकाना है ।

कल शाम को 8:00 बजे मेरे पति किसी आवश्यक कार्य से घर से बाहर थे। मैंने उन्हें फोन करके कहा कि आते हुए प्याज ले आना। उनके रास्ते में सब्जी मंडी पड़ती थी ।आमतौर पर इस वक्त सब्जी मंडी में भीड़ ज्यादा नहीं होती थी और सब्जियां भी काफी मात्रा में उपलब्ध रहती थीं। परंतु कल स्थिति इसके विपरीत थी।। शाम को हिसार में अफवाह फैल गई कि सब्जी मंडी और रेहड़िया बंद रहेंगी ।इस अफवाह के फैलते ही सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल पड़े। सब्जी मंडी के बाहर गाड़ियों की पार्किंग के लिए भी जगह नहीं बची थी। सब्जी मंडी में भी कोई सब्जी नहीं बची थी ।लोगों में अधिक से अधिक इकट्ठा करने की होड़ लगी हुई थी। एक सब्जी की दुकान वाला आलू की एक बोरी लेकर आया जैसे ही उसने बोरी पलटी लोग उसके ऊपर टूट पड़े और 5 मिनट में ही वो खत्म हो गया ।उसने फिर दूसरी बोरी पलटी उसकी भी यही हालत थी ।

प्रतिलिपि पर पढ़ें – “कृष्णा का प्यार”

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